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भारत में २००१ मे ऍफ़एम् रेडियो के आने के बाद रेडियो को न सिर्फ नया जीवन मिला बल्कि एक नए दौर की शुरुआत हुई।  टेलीविज़न की शुरुआत के बात रेडियो अपनी घटती लोकप्रियता के कारणकई समस्याओं से जूझ रहा था।रेडियो में निजी चैनल्स के आ जाने के बाद न सिर्फ इसकी लोकप्रियता में बढ़ोत्तरी हुई बल्कि रेडियो की पहुँच उस वर्ग तक भी हुई जो पहले इसका हिस्सा नहीं थे। रेडियो इस नए रूप के बाद विज्ञापनदाताओं के लिए ये एक अच्छे और कम खर्चीले विकल्प के रूप में सामने आया। रेडियो के स्वरुप के साथ उसके विज्ञापनों की प्रस्तुति भी वक़्त के साथ काफी हद तक बदली।आज के समय में हमारे समाज का एक बड़ा हिस्सा वो चाहे शहरी हो या ग्रामीण, रेडियो और रेडियो पर बजते विज्ञापन सभी के जीवन का चाहा अनचाहा हिस्सा हैं। 

जब भी कभी हम चलते फिरते, कार में बैठे, या घर पर काम में व्यस्त पास में बजते हुए रेडियो के किसी चैनल पर किसी कार्यक्रम के दौरान विज्ञापन को सुनते हैं या यूँ कहें की जब वह विज्ञापन हमें सुनना पड़ता है तो निश्चित ही वह हमारे उस कार्यक्रम की तारतम्यता को कुछ पल के लिए विराम दे देता है। कभी -कभी तो वह विज्ञापन हमें उबाऊ भी  लगता है पर बहुत सेविज्ञापन ऐसे भी होते हैं जो न सिर्फ रोचक होते हैं बल्कि वह अपने वांछित श्रोता समूह के मन और मस्तिष्क पर अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं और सालों बाद भी सुनने वालों को याद रहते हैं। 

किसी भी विज्ञापन के लिए  उसकीस्क्रिप्ट बहुत महत्त्वपूर्ण है और रेडियो विज्ञापन के लिए ये बात ज़्यादा महत्त्वपूर्ण इसलिए भी है क्यूंकि रेडियो जनसंचार का एक श्रव्य माध्यम है जहाँ विज्ञापन सिर्फ आवाज़ से शुरू होकर आवाज़ पर ही ख़त्म होता है। ज़्यादातर विज्ञापनों  की अवधि भी कुछ सेकण्ड्स की ही होती है।सबकुछ निर्भर होता है उन चंद सेकण्ड्स के लिए बनाये गए विज्ञापन की स्क्रिप्ट पर, जो इतनी रोचक और असर छोड़ने वाली हो कि वह अपने वाँछित श्रोता समूह को न सिर्फ सुनने के लिए आकर्षित करे अपितु उसमे ऐसी बात भी होनी चाहिए कि उसका प्रभाव उनके मन मस्तिष्क पर दस्तक दे और उन्हें विज्ञापित उत्पाद या सेवा का प्रयोग करने को प्रेरित करे। विज्ञापन का मूलभूत उद्देश्य भी यही होता है। ये सिर्फ विज्ञापन को सोचने और  लिखने वालों पर निर्भर होता है की वह विज्ञापन को कितना प्रभावी बना पाते हैं। 

रेडियो के विज्ञापन की  स्क्रिप्ट लिखने के लिए पहले कुछ मूलभूत बातों को ध्यान में रखा जाता है जैसे की विज्ञापन के वांछित श्रोता किस वर्ग और समूह के हैं ? विज्ञापन की अवधि कितनी है? विज्ञापन में क्या लाभ आप प्रस्तुत कर रहे हैं, आप अपने विज्ञापन के श्रोता से क्या चाहते हैं इत्यादि। 

किसी भी रेडियो  विज्ञापन की स्क्रिप्ट या संवाद लिखते समय कुछ बहुत महत्वपूर्ण कारकों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ये स्क्रिप्ट को न सिर्फ प्रभावशाली बनाते हैं बल्कि विज्ञापन के उद्देश्य को पूरा करने में अपना योगदान देते हैं। 

 रेडियो विज्ञापन में ध्वनि प्रभाव एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक होता है। स्क्रिप्ट को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के ध्वनि के प्रभावों का उपयोग विज्ञापन को श्रोता के लिये न सिर्फ रोचक बनाता है बल्कि कभी कभी इनका प्रयोग विज्ञापन में संवाद से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो जाता है जब श्रोता विज्ञापन के किसी ख़ास ध्वनि प्रभाव को उत्पाद के साथ जोड़कर देखते है।

 जो सन्देश हम शब्दों के द्वारा अपने वांछित श्रोता तक पहुँचाना चाहते हैं वह बिलकुल स्पष्ट व सटीक हो। रेडियो के विज्ञापन का लेखन कुछ इस प्रकार होना चाहिए की शब्दों के माध्यम से एक चित्र सा प्रस्तुत हो जाय, यानि वो श्रोता को विज्ञापन सम्बन्धी कल्पना करने को प्रेरित करे। विज्ञापन का लेखन सादा व सटीक होना चाहिए तभी वह अधिक प्रभावशाली होगा।विज्ञापन की स्क्रिप्ट में प्रयोग किये गए  शब्दों में संतुलन का ख़ास ख्याल रखा जाना चाहिए।

तीसरी महत्त्वपूर्ण बात है कि जब भी रेडियो विज्ञापन की स्क्रिप्ट  लिखी जाये तो वांछित श्रोता के लिए उस विज्ञापन में कोई न कोई ऑफर जरूर प्रस्तुत किया गया हो। अगर विज्ञापन में ऐसा प्रावधान नहीं होगा तो यह संभव है कि  श्रोता उसकी ओर कमआकर्षित हो। 

विज्ञापन का उद्देश्य किसी भी उत्पाद या सेवा के बारे में जागरूकता व उसकी बिक्री बढ़ाना होता है इसलिए कभी कभी रेडियो के विज्ञापनों में वांछित श्रोता द्वारा विज्ञापन सुनने के बाद तुरंत सक्रिय होने के लिए कुछ ऐसी बातें कही जाती हैं हो उन्हें तुरंत सक्रिय होते को प्रेरित करती है जैसे ‘ तुरंत संपर्क करें’ , ‘सीमित ऑफर’ इत्यादि। 

कभी कभी विज्ञापन की स्क्रिप्ट कुछ इस तरह लिखी जाती है जो किसी  समस्या को प्रस्तुत करती है और विज्ञापित उत्पाद या सेवा को उस समस्या के निदान के रूप में दिखाती  है । इस प्रकार लिखी हुई स्क्रिप्ट बहुत प्रभावशाली होती है क्योंकि वांछित श्रोता समूह खुद को विज्ञापन से जोड़कर देखता है। विज्ञापन में बताई गयी समस्या उसे अपनी लगती है और उसका उपाय यानि की उत्पाद या सेवा उसे विज्ञापन के समाप्त होने के बाद भी याद रह जाती है। उदहारण के लिए अगर कोई विज्ञापन बीमा से जुड़ा हुआ है तो उस विज्ञापन की स्क्रिप्ट में स्पष्ट तौर पर बीमा न कराये जाने से होने वाली भविष्य की अनिश्चितताओं से जुडी बातें प्रस्तुत की जाएँगी और फिर बीमा के उस विज्ञापन को उन परेशानियों के निदान के रूप में प्रस्तुत किया जायेगा। 

रेडियो विज्ञापन की स्क्रिप्ट में इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए की विज्ञापन का प्रस्तुतकर्ता कौन है, अक्सर किसी जानी मानी हस्ती को विज्ञापन के प्रचार के लिए  लिया जाता है ,तब इस बात पर ध्यान देने की ज़रुरत होती है कि विज्ञापन की स्क्रिप्टउस व्यक्ति की लोगों के बीच क्या छवि है इसकोध्यान में रखकरलिखी जानी चाहिए। 

रेडियो विज्ञापन के लिए  लिखी गयी हर अच्छी स्क्रिप्ट ऐसी ही बहुत सी बातों का  समन्वय होती हैं। हर एक विज्ञापन अथक परिश्रम ,सृजन क्षमता और  शोध का परिणाम होती है।